Saturday, 27 April 2019

लघुकथा

           चाँदी का झुमका
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आज सीता की बड़ी बहन की नई-नवेली बहू की मुँह दिखाई की रस्म थी।सीता की दीदी की शादी बहुत ही अमीर घर में हुई थी।उसकी और उसकी दीदी की आर्थिक स्थिति  में बहुत फर्क था।जब उसकी दीदी ने अपने बड़े बेटे की शादी का निमंत्रण दिया तो वह बहुत परेशान हो गई ।वह मंहगा उपहार देने की स्थिति में नहीं थी।इसलिए वह वहाँ जाने से हिचकिचा रही थी।लेकिन उसकी बेटी ने कहा कि,"माँ मौसी ने तुम्हे इतने प्यार से तुम्हे बुलाया है तो तुम्हे वहाँ जरूर जाना चाहिए ।रही उपहार की बात तो,उपहार की कीमत नहीं,उसे कितने प्यार से  दिया जा रहा है वह देखना चाहिए ।
    दूसरे दिन उसकी बेटी ने उसे एक चाँदी का झुमका ला कर दिया ।झुमका में  रंग-बिरंगे चमकते नग जड़े हुए थे,जिससे झुमका बहुत ही प्यारा दिख रहा था ।झुमका देखकर सीता बहुत खुश हो गयी।
       दीदी की बहू की मुँह-दिखाई का रस्म शुरू हो गयी ।एक से बढ़कर एक गहनों के साथ अमीरी का नुमाईश शुरू हो गयी।कोई हीरों का सेट दे रहा था तो कोई जड़ाऊ ।सारे गहने एक से बढ़ कर एक थे।सीता का दिल बैठा जा रहा था ।इतने कीमती गहनों के बीच कैसे वह सस्ता सा चाँदी का झुमका दे।शर्म के मारे उसने झुमके को अपने पर्स में डाल दिया ।
        अचानक हल्ला शुरू हो गया।बहू का एक हीरों का हार नहीं मिल रहा था ।तभी दीदी की एक रिश्तेदार ने कहा कि उसने सीता को कुछ पर्स में डालते हुए देखा है ।अपमान से सीता की आँखे भर आयी।तभी दीदी की जेठानी उठी और उसके हाथ से पर्स छिन लिया ।फिर पर्स खोल कर उसे उलट दिया ।चाँदी का झुमका पर्स से निकल कर जमीन पर गिर गया ।सभी  स्तब्ध रह गये।
        जमीन पर पड़े चाँदी के झुमके के रंग-बिरंगे नग चमक रहे थे और सीता की आँखों के आँसू उसे प्रतिस्पर्धा दे रहे थे।

                रंजना वर्मा