सुहाग की सेज...
'' ओए होए.. गुड्डो रानी, अकेले अकेले मुस्कुरा रही हो... जरा गाल तो देखो बन्नो के... शर्म से गुलाबी हुए जा रहे हैं.. '' कहती हुए प्रीति ने अपनी सखी गुंजन को छेड़ना शुरू कर दिया। गुंजन की शादी जो हो रही थी समीर के साथ। आज बारात आनेवाली थी। गुंजन इन्हीं मीठे सपनों में खोयी हुयी मुस्कुरा रही थी।
'' सुन गुंजन, सुहागरात की सारी बातें मुझे बतानी है तुझे... कुछ भी छुपाया तो मैं कट्टी हो जाऊंगी तुझसे... '' प्रीति ने उसे चिकोटी काटते हुए छेड़ा।
बड़ी भव्य बारात आयी और धूमधाम से गुंजन की शादी हो गयी। बड़े - बूढ़ों के ' सदा सुहागिन रहो ' का आशीर्वाद लेकर अपने नये जीवन के सुखद सपने सजाये गुंजन अपने ससुराल विदा हो गयी।
गुंजन घूँघट किये हुए छुई-मुई-सी अपने सुहाग की सेज पर बैठी समीर का इंतज़ार कर रही थी। छोटी - सी आहट पर भी उसके दिल की धड़कन तेज हो जाती थी। अचानक उसने शोरगुल की आवाज़ सुनी। रोने-चिल्लाने की आवाज आनी शुरू हो गयी। वह समझ नहीं पा रही थी कि माजरा क्या है? तभी उसकी ननद रोती हुयी आयी और बोली कि '' भाभी, भैया आपके लिए सुहागरात का तोहफ़ा लाने गये थे कि अचानक एक तेज गति से आती हुयी ट्रक ने उन्हें बुरी तरह कुचल दिया। भाभी... भइया... हमें छोड़ गए...'' इसके साथ ही वह गुंजन को अपने बांहों में भर बुक्का फाड़ के रोने लगी।
गुंजन पथराई आखों से अपने ' सुहाग की सेज ' को घूर रही थी...।
गीता चौबे
रांची झारखंड
'' सुन गुंजन, सुहागरात की सारी बातें मुझे बतानी है तुझे... कुछ भी छुपाया तो मैं कट्टी हो जाऊंगी तुझसे... '' प्रीति ने उसे चिकोटी काटते हुए छेड़ा।
बड़ी भव्य बारात आयी और धूमधाम से गुंजन की शादी हो गयी। बड़े - बूढ़ों के ' सदा सुहागिन रहो ' का आशीर्वाद लेकर अपने नये जीवन के सुखद सपने सजाये गुंजन अपने ससुराल विदा हो गयी।
गुंजन घूँघट किये हुए छुई-मुई-सी अपने सुहाग की सेज पर बैठी समीर का इंतज़ार कर रही थी। छोटी - सी आहट पर भी उसके दिल की धड़कन तेज हो जाती थी। अचानक उसने शोरगुल की आवाज़ सुनी। रोने-चिल्लाने की आवाज आनी शुरू हो गयी। वह समझ नहीं पा रही थी कि माजरा क्या है? तभी उसकी ननद रोती हुयी आयी और बोली कि '' भाभी, भैया आपके लिए सुहागरात का तोहफ़ा लाने गये थे कि अचानक एक तेज गति से आती हुयी ट्रक ने उन्हें बुरी तरह कुचल दिया। भाभी... भइया... हमें छोड़ गए...'' इसके साथ ही वह गुंजन को अपने बांहों में भर बुक्का फाड़ के रोने लगी।
गुंजन पथराई आखों से अपने ' सुहाग की सेज ' को घूर रही थी...।
गीता चौबे
रांची झारखंड
1 comment:
Emotional story 👍
Post a Comment