Wednesday, 24 April 2019

कविता

दिल धड़कता है अभी भी
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दिल धड़कता है अभी भी
बोझ उठाते हैं हाथ अभी भी
पांव थिरकते है अभी भी
सपने हसीं हैं अभी भी
मैं जवां हूँ अभी भी

तो क्या हुआ जो देख लिया मैंने
बहार जिन्दगी के कई
तो क्या हुआ जो देख लिया मैंने
रंग दुनिया के कई
कई रंग अनजाने है अभी भी
कई सपने अधूरे हैं अभी भी
मैं जवां हूँ अभी भी

सूरज रोज लेकर आता है
किरणें नई
दिन रोज लेकर आता है
उम्मीदें नई
दिल में कुछ खास करने की चाहत है अभी भी
कुछ और जीने की तमन्ना  है अभी भी
मैं जवां हूँ अभी भी

कितने लोग जुदा हो गये हमसे
कितने लोग जुड़ गए हम से
जाने वालों की याद है दिल में  अभी भी
कुछ और लोगों को बसाना है  दिल में  अभी भी
दिल धडकता है अभी भी
मैं जवां हूँ अभी भी

                 रंजना वर्मा
               राँची,झारखंड

2 comments:

Geeta choubey said...

बहुत खूब

G C Mishra said...

जीवन मे उत्साह भरने वाली इस आशावादी कविता के लिए बधाई।