Tuesday, 30 April 2019

कविता

सुहाग
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तुम ही मेरे राग हो, अनुराग हो,
और मेरे सुहाग हो।
तुम ही मेरे प्यार हो, आधार हो
जीवन श्रृंगार हो।
जग ये भवसागर है,
जीवन एक नैया है।
मेरी इस नैया के
 तुम ही खेवनहार हो।
जीवन की बगिया में,
खुशबू से भरे हुए
फूलों की बहार हो।
तुमहीं दिलोजान हो
और मेरे प्राण हो।
ईश्वर से पाया जो,
वो इक वरदान हो।
खिल गया है दिल मेरा,
जबसे तुमको पाया है।
तेरा ये साथ ही
जीवन सरमाया है।
                      रूणा रश्मि

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