Wednesday, 24 April 2019

नर और नारी की तुलना क्यूँ..


नर और नारी की तुलना क्यूँ?

जाने कितनी व्यथाएं  नारी सहती रही हैं
जाने कितनी कथाएं इनकी अनकही रही हैं

चाहे कल की नारी या आज की नारी हो
हर युग में रही है हरदम पुरुषों पे भारी वो

एक महिला से कैसे पुरुष तुलना कर पाएगा
कितना भी कर ले तरक्की,नहीं महिला बन पाएगा

करें ही क्यूँ तुलना हम नारी और नर की
बड़े बेतुके विचार हैं ये, बातें हैं बे पर की

ईश्वर ने बनाया उन्हें बिल्कुल अलग अलग है
नर और नारी की संरचना भी तो बिलग है

नर में जो नारी खोजे, कितने बड़े मूरख हैं वो
हां इतना जरूर है कि एक दूसरे के पूरक हैं वो

मिले जुले काम हैं पुरुष और नारी के
मिल के चलें जैसे पहिए किसी गाड़ी के

अपने अपने तरीके से दोनों करें राज
अपनी अपनी समझ से दोनों करें काज

न शि‍कवा हो कोई , ना हो कोई गिला
दोनों के सहयोग से चले जीवन का सिलसिला
                                गीता चौबे
                               रांची झारखंड