Friday, 19 April 2019

माइंस वाला ढाबा
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थोड़ी सी पुरानी ये है इक कहानी ,
सुनाती हूँ सबको मैं अपनी जुबानी।

पति के मेरे थी पोस्टिंग उस माइंस में
पढ़ा था कभी जिसको हमने भी साइंस में।

जगह थी वो प्यारी बड़ी ही सुहानी
पर ये बस नहीं है हमारी कहानी।

असली उस मुद्दे पर अब हम हैं आते
घटी थी जो घटना, उसे हैं बताते

साथी ने इनकी जब ब्याह रचाई,
वो पत्नी बेचारी बड़े शहर से आई।

देखे जो उसने थे सपने सलोने,
पूरे वो सारे थे माइंस में होने।

हम तीन जोड़ों की अच्छी थी यारी,
हुई थी जो मशहूर दोस्ती हमारी।

खाने का बाहर  हुआ जब विचार
 हो गए थे हम सब फटाफट  तैयार।

निकले थे सब लेके अपनी सवारी,
की थी पर उसने गजब की तैयारी।

तैयारी जो देखी हँसी सबको आई
पर सबने हँसी अपने मन में दबाई।

दिल में तो उसके हुआ था धमाका,
देखा जो उसने वो झोपड़ीनुमा ढाबा।

थी शानदार होटल की उम्मीद जिसको
ले आए थे ऐसे इक ढाबा में उसको।

यही वो जगह है फिर उसको बताया
फिर जोरों से सबने ठहाका लगाया।

पहले तो थोड़ी सी वो सकपकाई
फिर हँसी में हमारे थी शामिल हो आई।

वो घटना अभी भी है जब याद आती
तो होठों पे बरबस ही मुसकान लाती।

घटना है सच्ची जो हमने सुनाई
बस थोड़ीसी नमक मिर्च उसमें मिलाई।
                                           रूणा रश्मि

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