प्रार्थना
दे दो बस इतना वरदान
मिल जाए चाहे लाख खुशी
पर आए ना मुझको अभिमान
दुख आए मुझपर लाख मगर
नहीं छुटे पल-भर सत्य डगर
भूल कभी जो हो जाए तो
राह दिखा ओ कृपानिधान
हे अजर-अमर हे..........
कोई चाहे पाना धन औ मान
कोई चाहे पाना पूर्ण जहान
मैं तो बस इतना ही चाहूँ
बन जाऊं मैं इक नेक इंसान
हे अजर-अमर हे ..........
घट-घट में तुम तो बसते हो
हर मन की बात समझते हो
मेरे मन की भी बात समझ
कर दो तुम मेरा कल्याण
हे अजर-अमर हे ..........
संतोष सुधाकर

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