Wednesday, 24 April 2019

छायावाद के स्तंभ    कवि जयशंकर प्रसाद
जन्म    30 जनवरी 1889
मृत्यु     15 नवंबर 1937
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कवि एक बहुत ही महान थे वो
हिंदी साहित्य का मान थे वो

थे काल कई इस काव्य जगत में
आया था जब आधुनिक काल
शैली भी थी कई और उसमें
थी इक शैली छायावाद।

इस के ही महान् स्तम्भ थे
वो थे जयशंकर प्रसाद
थे वो कवि और उपान्यासकार
कथाकार संग नाटककार।

भावों की गहराई हो या
हो प्रकृति की सुंदरता
सामाजिक वेदना में भी
अभिव्यक्ति की थी कुशलता।

कठिन परिस्थिति आई फिर भी
रोक ना पाई थी प्रतिभा
राष्ट्रप्रेम का काव्य रचा और
बने महान वो रचयिता।
                            रूणा रश्मि
                         राँची , झारखंड

2 comments:

G C Mishra said...

इस अवसर पर जयशंकर प्रसाद की कालजयी कृति 'कामायनी' का एक अंशः
क्या कहती हो ठहरो नारी! संकल्प-अश्रु जल से अपने -
तुम दान कर चुकी पहले ही जीवन के सोने-से सपने।
नारी! तुम केवल श्रद्धा हो विश्वास-रजत-नग पगतल में,
पीयूष-स्रोत बहा करो जीवन के सुंदर समतल में।
देवों की विजय, दानवों की हारों का होता युद्ध रहा,
संघर्ष सदा उर-अंतर में जीवित रह नित्य-विरुद्ध रहा।
आँसू से भींगे अंचल पर मन का सब कुछ रखना होगा -
तुमको अपनी स्मित रेखा से यह संधिपत्र लिखना होगा।"
- जयशंकर प्रसाद

Geeta choubey said...

जयशंकर प्रसाद की कालजयी रचना ...