Wednesday, 24 April 2019

जिंदगी क्या है

           जिंदगी क्या है
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बीती हुई बातों की
जिंदगी एक किताब है,
आने वाले वक्त का
शायद इक एहसास है।
खुशी के पलों में
जिंदगी उल्लास है,
गम के गर साये हों
जिंदगी उदास है।
वक्त के साथ जो बढ़ना है
जिंदगी इक दौड़ है।
सबसे आगे जो निकलना हो
तो ये इक होड़ है।
दौड़ते ही रहना है इसलिएै
जिंदगी रफ्तार है,
अगर कहीं ठहरो तो
भीड़ की कतार है।
छूने की कोशिश करें तो
है ये इक चंचल तितली,
बहने को गर छोड़ दें तो
बनती है ये मनचली।
ईश्वर के हाथों की
कठपुतली है जिंदगी
गर श्रद्धा हो ईश्वर में
तो है ये इक बंदगी।
देखो तो जिंदगी के
अनगिनत रूप हैं,
भावना हो जैसी
इसका वैसा ही स्वरूप है।
                     रूणा रश्मि

4 comments:

Geeta choubey said...

जिंदगी का सुंदर चित्रण

Geeta choubey said...


👌👌

G C Mishra said...

जीवन के फ़लसफ़े पर बहुत अच्छी कविता। साधुवाद! इसी तरह लिखती रहिए।

runa said...

धन्यवाद 🙏🙏