Tuesday, 7 May 2019

अक्षय तृतीया

लघुकथा--अक्षय तृतीया
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आज अक्षय तृतीया का मतलब आज के दिन गहना खरीदना शुभ होता है,ज्यादातर लोग यही मानते हैं ।रेखा की भी सारी सहेलियों ने तरह तरह के गहने खरीदें ।वे एक दूसरे को फोन कर अपने गहनों के बारे में बता रहीं थीं और पूछ भी रही थीं ।उनलोगों ने रेखा से भी पूछा कि उसने क्या खरीदा?रेखा ने कहा कि उसके लिए हीरा आ रहा है ।गहना खरीदने की सार्थकता तब ही है जब उसे सब देखें ।तय हुआ कि किसी एक के यहाँ सभी इकट्ठा हों और अपने गहने एक दूसरे को दिखायें।रेखा ने कहा कि सभी उसके यहाँ ही आ जायें, तब तक उसका हीरा भी आ जायेगा ।
         थोड़ी देर बाद रेखा के यहाँ बड़ी चहल पहल थी ।चाय नास्तों के बीच गहनों की भी देखा देखी हो रही थी।तभी घंटी बजी ।रेखा ने दरवाजा खोला ।उसकी कामवाली कमला अपनी बेटी के साथ हाथों में मिठाई का डब्बा लिए खड़ी थी।उसे देखकर रेखा अपनी सहेलियों से  बोली,"देखो मेरा हीरा आ गया।कहते हैं न कि अक्षय तृतीया के दिन जो भी शुभ कार्य किये जाते हैं,उनका अक्षय फल मिलता है ।आज से चार साल पहले आज के ही दिन मैंने कमला की बेटी की काबिलियत को देखकर उसे पढ़ाने का संकल्प लिया था ।आज ये दसवीं में अपने पूरे विद्यालय में प्रथम आयी है ।मैं इसी हीरे की बात कर रही थी।इस हीरे की चमक के सामने सारे गहने फीके हैं ।"रेखा गर्व से मुस्करा रही थी।

                         रंजना वर्मा

1 comment:

संतोष सुधाकर said...

Meaningful short story 👌👌👌👍