पानी रे पानी
***********
पानी रे पानी अजब तेरी कहानी
मिलती है तुझसे ही सबको जिंदगानी।
जल बिन है असंभव जीवन
कहता है धरती पर जन जन।
हर जीवन को आस है तेरी
जीव जन्तु को प्यास है तेरी।
तुझको पाकर सुकूं जो आया
लगा कि जैसे अमृत पाया।
पर तेरी जब बिगड़ी चाल
बुरा हो गया सबका हाल।
हो गया फिर जीना दुष्वार
और मच गया हाहाकार।
जल जब चहुँदिस भरने लगे
त्राहि त्राहि सब करने लगे।
घड़ी आ गई बड़ी विकट
जीवन पर आया संकट।
अमृत का जो रूप था तेरा
विष का क्यों अब स्वरूप हो गया।
दिखते हैं दो अलग रूप ये
पर तेरे ही हैं स्वरूप ये।
पालनहार का एक रूप है
संहारक दूजा स्वरूप है।
करो कभी नहीं संहार
बने रहो बस पालनहार।
रूणा रश्मि
***********
पानी रे पानी अजब तेरी कहानी
मिलती है तुझसे ही सबको जिंदगानी।
जल बिन है असंभव जीवन
कहता है धरती पर जन जन।
हर जीवन को आस है तेरी
जीव जन्तु को प्यास है तेरी।
तुझको पाकर सुकूं जो आया
लगा कि जैसे अमृत पाया।
पर तेरी जब बिगड़ी चाल
बुरा हो गया सबका हाल।
हो गया फिर जीना दुष्वार
और मच गया हाहाकार।
जल जब चहुँदिस भरने लगे
त्राहि त्राहि सब करने लगे।
घड़ी आ गई बड़ी विकट
जीवन पर आया संकट।
अमृत का जो रूप था तेरा
विष का क्यों अब स्वरूप हो गया।
दिखते हैं दो अलग रूप ये
पर तेरे ही हैं स्वरूप ये।
पालनहार का एक रूप है
संहारक दूजा स्वरूप है।
करो कभी नहीं संहार
बने रहो बस पालनहार।
रूणा रश्मि
No comments:
Post a Comment