Friday, 24 May 2019

जाकी रही भावना जैसी....

रवि मैकडोवेल् एण्ड कम्पनी में सिनियर क्वालिटी कंट्रोल औफिसर था और दक्षिण भारत से ट्रांसफर हो कर आज ही रांची आया था। रांची में रवि कम्पनी के गेस्ट हाउस में रुका था, जिसका केयर टेकर 'बिंगा', बिल्कुल नया नेपाली गोरा चिट्टा, छोटे कद का हंसमुख बन्दा था।
३६ घण्टे की लम्बी यात्रा कर रवि रांची आया था सो उसके सिर में तेज दर्द हो रहा था। वह थोड़ा फ्रेश होकर सेन्ट्रल हौल में रखे सोफे पर आराम करने के लिए बैठ गया। बिंगा ने सोचा कि साहब बहुत थक गए होंगे, तो शायद कोई drinks लेना पसंद करेंगे। बड़े अदब से एक ट्रे में ठण्ढे पानी की एक बोतल, सोडा की एक बोतल और एक खाली गिलास, शीशे की मेज़ पर लाकर आहिस्ता से रख दिया। फिर एक प्लेट में भुना हुआ काजू और चिप्स भी ला कर रखते हुए उसने रवि से धीमी आवाज में पूछा "साब और कुछ लाऊं?"
चुकी रवि के सर में बहुत दर्द हो रहा था सो उसने कहा हां एक नव रत्न तेल लेते आओ। बिंगा हड़बड़ाहट में तेल शब्द सुना नहीं। उसे लगा कि ये तो दारु  कम्पनी के बड़े साहब हैं तो हो न हो ये जो बोल रहे हैं वह कोई व्हिसकी का नया ब्रांड होगा, सो नव रत्न व्हिसकी ढुंढता वह आस-पास की सभी शराब की दुकानों की खाक छानने लगा, किन्तु उसे नव रत्न व्हिसकी कहीं नहीं मिली। सारे दुकान वाले बोले कि इस ब्रांड की कोई व्हिसकी नहीं होती। बिंगा सोचता रहा ये नये साहब क्या सोचेंगे मैं उनकी पसंद की व्हिसकी भी नहीं ला पाया। फिर उसने सोचा नव रत्न तो नहीं मिला तो कम से कम कोई अच्छी व्हिसकी ले लेता हूं, सो सिंगल मौल्ट की एक बोतल उसने साहब के लिए ले ली।
वो ज्योंहि गेस्ट हाउस में प्रवेश किया तो रवि ने अधीर सर्वर में पूछा "क्या हुआ नव रत्न का ,दर्द से सर फटा जा रहा है।" बिंगा ने रवि को समझाया कि यहां किसी भी दुकान में नहीं मिला, इसलिए सिंगल मौल्ट ले लिया हूं। रवि चिल्ला उठा "क्या मैं इसे सर पर लगाऊं..........."