×××मजदूर दिवस ×××
÷÷÷÷÷÷÷÷÷÷÷÷÷÷
लगी मजदूरों की मंडी
प्रतीक्षारत खड़ी मजदूरों की टोली
ठेकेदार सब आयेंगे
ट्रकों में ये ढूंसे जायेंगे
इमारतों की नींव
इनके पसीने से सींचते
ईटों में इनकी यादें बसते
दिन भर ये मेहनत करते
रातों में घोड़े बेच कर सोते
रोज कमाते,रोज खाते
काम मिला तो बल्ले बल्ले
नहीं तो खाली पेट सोते
आलीशान घर दूजे के लिए बनाते
खुद एक झोपड़े को तरसते
काम और खाना,नहीं होता काम दूजा
बचपन यहाँ दम तोड़ता
और फिर मजदूर पैदा होता ...
रंजना वर्मा
÷÷÷÷÷÷÷÷÷÷÷÷÷÷
लगी मजदूरों की मंडी
प्रतीक्षारत खड़ी मजदूरों की टोली
ठेकेदार सब आयेंगे
ट्रकों में ये ढूंसे जायेंगे
इमारतों की नींव
इनके पसीने से सींचते
ईटों में इनकी यादें बसते
दिन भर ये मेहनत करते
रातों में घोड़े बेच कर सोते
रोज कमाते,रोज खाते
काम मिला तो बल्ले बल्ले
नहीं तो खाली पेट सोते
आलीशान घर दूजे के लिए बनाते
खुद एक झोपड़े को तरसते
काम और खाना,नहीं होता काम दूजा
बचपन यहाँ दम तोड़ता
और फिर मजदूर पैदा होता ...
रंजना वर्मा
No comments:
Post a Comment