थोड़ा सा मुसकुराओ😊😊
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भटक रहे हैं यहाँ वहाँ
खुशी न जाने मिले कहाँ
पर खुशियों का है जो खजाना
मुश्किल नहीं इसे है पाना
ढ़ूँढ़ो अपने घर के अंदर
झाँको अपने मन के अंदर
बागों के रौनक को देखो
रंग बिरंगे फूल खिले हैं
पंछी का कलरव यूँ लगता
वायु में संगीत घुला है
नन्हा बालक दौड़ रहा है
और हँस रही प्यारी गुड़िया है
इस जग में चहुँ ओर जो देखो
खुशी के मोती बिखरे पड़े हैं
हाथ बढ़ाकर इन्हें उठाओ
सुंदर सा एक हार बनाकर
इन खुशियों को गले लगाओ।
रूणा रश्मि
राँची , झारखंड
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भटक रहे हैं यहाँ वहाँ
खुशी न जाने मिले कहाँ
पर खुशियों का है जो खजाना
मुश्किल नहीं इसे है पाना
ढ़ूँढ़ो अपने घर के अंदर
झाँको अपने मन के अंदर
बागों के रौनक को देखो
रंग बिरंगे फूल खिले हैं
पंछी का कलरव यूँ लगता
वायु में संगीत घुला है
नन्हा बालक दौड़ रहा है
और हँस रही प्यारी गुड़िया है
इस जग में चहुँ ओर जो देखो
खुशी के मोती बिखरे पड़े हैं
हाथ बढ़ाकर इन्हें उठाओ
सुंदर सा एक हार बनाकर
इन खुशियों को गले लगाओ।
रूणा रश्मि
राँची , झारखंड
4 comments:
Nice one...
सही कहा, खुशियाँ अपने ही अंदर है, खुबसूरत कविता 👌👍
सुंदर भाव, प्यारी कविता!
वैसे, लय बनाए रखने के लिए थोड़ी एडिटिंग की जा सकती थी। बड़े रचनाकार भी अपनी रचना को प्रकाशित करने से पहले बार बार एडिटिंग करते हैं
👌👌
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