लघुकथा-लाल डायरी
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सौम्या की हाथों में उसकी माँ अनुपमा की डायरी थी।उसकी आँखों से अश्रु की अविरल धारा बह रही थी ।उसे अपने पर बहुत ग्लानि हो रही थी ।वह सोच रही थी ।सभी कहते थे कि, उसमें और उसकी बहन कली में कितना फर्क है ।लगता ही नहीं है कि दोनों सगी बहनें हैं ।कली बहुत ही खुबसूरत,शांत,पढ़ाई और खेल सबमें अव्वल थी।वहीं वह सांवली एवं साधारण रंग-रूप की लड़की थी।उसका एक ही काम था ,कली से ईर्ष्या करना।माँ बाप उसे अधिक प्यार करते थे ,जिसका वह नाजायज फायदा उठाती थी।कली की पसंद की हर चीज वो छिन लिया करती थी।
सुबह कली अपने पिता के साथ बाजार गयी और वहाँ से अपने लिए एक सुन्दर गुलाबी ड्रेस खरीद कर लायी।जब वह पहन कर अपनी माँ को दिखा रही थी, तो सभी दंग रह गये।एकदम वह एक गुलाबी परी लग रही थी।सौम्या ईर्ष्या से बर्दाश्त नहीं कर पायी और वह गुस्से चिल्लाने लगी,"आपलोग कली के लिए ही अच्छी ड्रेस खरीदते हैं ।मेरे लिए नहीं ।"अनुपमा और उसके पति ने उसे बहुत समझाया कि उसके लिए भी वैसी ही ड्रेस ला देंगे,पर वह नहीं मानी।गुस्से में अपने कमरे में जाकर रोती रही ।सभी उसे मनाते रहे पर वह नहीं मानी।रोते रोते उसकी आँख लग गयी।जब उसकी आँखे खुली तो उसने देखा कि, उसकी माँ अनुपमा एक लाल रंग की डायरी में कुछ लिख रही है ।उसकी उत्सुकता बढ़ी कि, "माँ क्या लिख रही है ।इस पुरानी लाल डायरी को उसने अभी तक क्यों नहीं देखा।"वह आखें बंद कर सोने का अभिनय करती रही ।जैसे ही उसकी माँ कुछ काम से बाहर गयी,उसने डायरी उठा लिया ।
जल्दी जल्दी वह डायरी पढ़ने लगी।डायरी पढ़कर वह स्तब्ध रह गयी।वह अनुपमा की नहीं,बल्कि उसकी बहुत प्रिय सहेली विजया की बेटी है ।जिसे विजया ने मरते समय अनुपमा की गोद में डाल दिया था।डायरी के आखरी पन्ना पर कुछ पंक्तियाँ मोती की तरह चमक रही थी।"कली के रहते सौम्या कभी खुश नहीं रह सकती।इसलिए मैंने और मेरे पति ने निर्णय लिया है कि, कली को हाॅस्टल में डाल देंगे ।"
सौम्या चिल्ला उठी,"नहीं माँ ऐसा मत करना ।"
रंजना वर्मा
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सौम्या की हाथों में उसकी माँ अनुपमा की डायरी थी।उसकी आँखों से अश्रु की अविरल धारा बह रही थी ।उसे अपने पर बहुत ग्लानि हो रही थी ।वह सोच रही थी ।सभी कहते थे कि, उसमें और उसकी बहन कली में कितना फर्क है ।लगता ही नहीं है कि दोनों सगी बहनें हैं ।कली बहुत ही खुबसूरत,शांत,पढ़ाई और खेल सबमें अव्वल थी।वहीं वह सांवली एवं साधारण रंग-रूप की लड़की थी।उसका एक ही काम था ,कली से ईर्ष्या करना।माँ बाप उसे अधिक प्यार करते थे ,जिसका वह नाजायज फायदा उठाती थी।कली की पसंद की हर चीज वो छिन लिया करती थी।
सुबह कली अपने पिता के साथ बाजार गयी और वहाँ से अपने लिए एक सुन्दर गुलाबी ड्रेस खरीद कर लायी।जब वह पहन कर अपनी माँ को दिखा रही थी, तो सभी दंग रह गये।एकदम वह एक गुलाबी परी लग रही थी।सौम्या ईर्ष्या से बर्दाश्त नहीं कर पायी और वह गुस्से चिल्लाने लगी,"आपलोग कली के लिए ही अच्छी ड्रेस खरीदते हैं ।मेरे लिए नहीं ।"अनुपमा और उसके पति ने उसे बहुत समझाया कि उसके लिए भी वैसी ही ड्रेस ला देंगे,पर वह नहीं मानी।गुस्से में अपने कमरे में जाकर रोती रही ।सभी उसे मनाते रहे पर वह नहीं मानी।रोते रोते उसकी आँख लग गयी।जब उसकी आँखे खुली तो उसने देखा कि, उसकी माँ अनुपमा एक लाल रंग की डायरी में कुछ लिख रही है ।उसकी उत्सुकता बढ़ी कि, "माँ क्या लिख रही है ।इस पुरानी लाल डायरी को उसने अभी तक क्यों नहीं देखा।"वह आखें बंद कर सोने का अभिनय करती रही ।जैसे ही उसकी माँ कुछ काम से बाहर गयी,उसने डायरी उठा लिया ।
जल्दी जल्दी वह डायरी पढ़ने लगी।डायरी पढ़कर वह स्तब्ध रह गयी।वह अनुपमा की नहीं,बल्कि उसकी बहुत प्रिय सहेली विजया की बेटी है ।जिसे विजया ने मरते समय अनुपमा की गोद में डाल दिया था।डायरी के आखरी पन्ना पर कुछ पंक्तियाँ मोती की तरह चमक रही थी।"कली के रहते सौम्या कभी खुश नहीं रह सकती।इसलिए मैंने और मेरे पति ने निर्णय लिया है कि, कली को हाॅस्टल में डाल देंगे ।"
सौम्या चिल्ला उठी,"नहीं माँ ऐसा मत करना ।"
रंजना वर्मा
2 comments:
अच्छी कथा 👌👍
बहुत अच्छी कहानी
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